नई दिल्ली
महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को लेकर सरकार ने अभी रास्ता बंद नहीं किया है. बीते मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन में कोई खास कामकाज नहीं हुआ. पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि सरकार ने इन दोनों विधेयकों के लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल हासिल कर लिया है और वह इन्हें पास करवा लेगी. लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया. फिर सदन अनिश्चित काल से लिए स्थगित हो गया. लेकिन, अब रिपोर्ट आ रही है कि सरकार ने अभी सभी रास्ते बंद नहीं किए हैं. कहा तो यह भी जा रहा था कि अगर तुरंत इन विधेयकों मंजूरी नहीं दिलाई गई तो 2029 के लोकसभा चुनाव में इसको प्रभावी बनाने लगभग असंभव हो जाएगा।
अब रिपोर्ट है कि राष्ट्रपति ने संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही औपचारिक तौर पर खत्म नहीं की है. इसके लिए अंग्रेजी में Prorogue शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. इसका मतलब होता है एक पूरे सत्र की समाप्ति. यानी सरकार ने अभी तक मानसून सत्र को Prorogue करने की घोषणा नहीं है. लोकसभा अध्यक्ष ने 13 अगस्त को सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल (Sine Die) तक स्थगित करने की घोषणा की थी. Sine Die का मतलब सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना होता है. इसमें सदन की अगली बैठक की कोई तारीख नहीं बताई जाती. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं होता कि सत्र खत्म हो गया है. यही तकनीकी चीज है जिसके आधार पर माना जा रहा है कि सरकार ने सदन को Prorogue करने की घोषणा न कर दोनों अहम विधेयकों को पास कराने का रास्ता खुला रखा है. आमतौर पर सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने के साथ उसे Prorogue कर दिया जाता है. यानी सत्र की समाप्ति की घोषणा भी कर दी जाती है, लेकिन बीते मानसून सत्र के साथ ऐसा नहीं किया गया है।
10 दिन बाद भी क्यों नहीं हुआ Prorogue?
लोकसभा की कार्यवाही 13 अगस्त को Sine Die हुई थी. इसके बाद 23 अगस्त तक भी सदन को Prorogue नहीं किया गया. इस देरी ने राजनीतिक चर्चा को हवा दे दी है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इसी को लेकर सरकार पर सवाल उठाया है. जयराम रमेश ने कहा कि लोकसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किए जाने के 10 दिन बाद भी उसका सत्रावसान नहीं हुआ है. उन्होंने इस देरी को असामान्य बताते हुए सवाल किया कि क्या सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक को पास कराने के लिए जरूरी संख्या जुटाने की कोशिश में हैं. हालांकि, यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक सवाल है. सरकार की ओर से इस देरी को लेकर ऐसी कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है।
Sine Die और Prorogue में क्या अंतर है?
संसद की कार्यवाही में इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल अक्सर होता है. लेकिन, दोनों का मतलब बिल्कुल अलग है. Sine Die का मतलब है सदन की बैठक को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना. इसमें यह तय नहीं किया जाता कि सदन अगली बार कब बैठेगा. लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति इसकी घोषणा कर सकते हैं. वहीं Prorogue का मतलब पूरे संसदीय सत्र को औपचारिक तौर पर खत्म करना है. यह राष्ट्रपति करते हैं. इसके लिए केंद्र सरकार की सलाह जरूरी होती है. यानी आसान भाषा में समझें तो Sine Die सदन की बैठक रोकता है, जबकि Prorogue पूरे सत्र को खत्म करता है. इसका मतलब यह हुआ कि 13 अगस्त को लोकसभा की बैठक जरूर अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुई, लेकिन जब तक राष्ट्रपति की ओर से सत्रावसान की घोषणा नहीं होती, तकनीकी तौर पर मानसून सत्र समाप्त नहीं माना जाता।
क्या इसी वजह से विधेयकों का रास्ता खुला है?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है. सरकार ने अभी तक मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया है. ऐसे में यह संभावना बनी हुई है कि जरूरत पड़ने पर इसी सत्र से जुड़ी संसदीय प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, केवल सत्रावसान न होने से यह तय नहीं हो जाता कि महिला आरक्षण या परिसीमन विधेयक तुरंत लाए ही जाएंगे. इन विधेयकों के लिए संविधान में बदलाव की जरूरत होगी. ऐसे विधेयक को संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पास कराना पड़ता है. इसलिए सरकार के लिए संख्या बल बेहद अहम है. महिला आरक्षण से जुड़ा प्रावधान परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है. सरकार अगर इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करना चाहती है तो समय का सवाल भी महत्वपूर्ण है।
पहले भी हुई है ऐसी देरी
कांग्रेस ने लोकसभा के सत्रावसान में हुई देरी को असामान्य बताया है. हालांकि, उपलब्ध संसदीय रिकॉर्ड के मुताबिक ऐसा पहली बार नहीं है जब Sine Die के बाद Prorogue होने में कई दिन लगे हों. जयराम रमेश ने खुद बताया कि 2015 के मानसून सत्र में यह अंतर 28 दिन का रहा था. 2021 में भी Sine Die के बाद सत्रावसान में 20 दिन लगे थे. इसलिए केवल देरी को आधार बनाकर यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार निश्चित तौर पर महिला आरक्षण या परिसीमन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है. लेकिन, मौजूदा राजनीतिक माहौल में इस देरी ने अटकलों को जरूर बढ़ा दिया है।


