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    Home » रूस में 9 महीने में 3,500 भालुओं की मौत, साइबेरिया में सबसे ज्यादा मामले; जानें क्या है वजह

    रूस में 9 महीने में 3,500 भालुओं की मौत, साइबेरिया में सबसे ज्यादा मामले; जानें क्या है वजह

    News DeskBy News DeskOctober 14, 20261 Views विदेश

    मॉस्को 
    रूस में साल 2026 की शुरुआत से अक्टूबर के पहले हफ्ते तक करीब 3,500 भालुओं को मार दिया गया. इनमें सबसे ज्यादा भालू साइबेरिया और रूस के सुदूर पूर्वी इलाकों में मारे गए. क्षेत्रीय अधिकारियों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, साइबेरिया में करीब 2,200 और सुदूर पूर्व में 1,100 से ज्यादा भालुओं को मारा गया. इन आंकड़ों से पता चलता है कि रूस के कई इलाकों में भालुओं को मारने की कार्रवाई की गई है। 

    इस साल रूस में भालुओं के इंसानी बस्तियों में पहुंचने और लोगों पर हमले करने की कई घटनाएं सामने आई हैं. कुछ हमलों में लोगों की जान भी गई है. ऐसे मामलों में उन भालुओं को मारने की कार्रवाई की गई जिन्हें इंसानों के लिए खतरा माना गया. अब भालुओं की बढ़ती संख्या और लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। 

    रूस के साइबेरिया इलाके में करीब 2,200 भालुओं को मारा गया. इनमें क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र में सबसे ज्यादा 898 भालू मारे गए. वहीं, इरकुत्स्क क्षेत्र में 414, तुवा में 263 और खाकासिया में 204 भालुओं को मारा गया. रूस के सुदूर पूर्वी इलाकों में भी 1,100 से ज्यादा भालू मारे गए. इनमें बुर्यातिया में 356 और कामचटका में 207 भालुओं को मारा गया. ये आंकड़े साल 2026 की शुरुआत से अक्टूबर के पहले हफ्ते तक के हैं। 

    भालू क्यों कर रहे हैं लोगों पर हमले?
    रूस के कई इलाकों में भालुओं के इंसानी बस्तियों तक पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं. कुछ मामलों में भालुओं ने लोगों पर हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई. ऐसे में अधिकारियों ने उन भालुओं को मारने की कार्रवाई की जिन्हें लोगों के लिए खतरा माना गया. जंगल के पास रहने वाले लोगों और पर्यटकों के लिए भालुओं का सामना करना खतरे की वजह बन सकता है. भालू आम तौर पर खाने की तलाश में घूमते हैं. लेकिन जब वे इंसानी बस्तियों के पास पहुंचते हैं, तो लोगों और जानवरों के बीच टकराव का खतरा बढ़ जाता है। 

    खाने की तलाश में बस्तियों तक पहुंच रहे भालू
    भालुओं के इंसानी इलाकों में आने की एक बड़ी वजह खाने की कमी हो सकती है. जंगल में जब उन्हें खाने के लिए फल, बेर और दूसरे खाद्य पदार्थ कम मिलते हैं, तो वे दूसरी जगहों पर खाने की तलाश करते हैं. इस दौरान वे गांवों और शहरों के पास भी पहुंच सकते हैं. खुले में पड़ा कचरा और खाने की बची हुई चीजें भी भालुओं को इंसानी बस्तियों की ओर खींचती हैं. अगर उन्हें किसी जगह आसानी से खाना मिल जाता है, तो वे दोबारा वहां आ सकते हैं. मौसम में बदलाव और सूखे का असर भी जंगल में मिलने वाले खाने पर पड़ सकता है। 

    रूस में 3 लाख से ज्यादा भूरे भालू
    रूस में भूरे भालुओं की संख्या काफी ज्यादा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में इनकी आबादी करीब 3.08 लाख है. पिछले करीब 30 साल में इनकी संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई है. भालुओं की बढ़ती संख्या और इंसानों पर हमलों को देखते हुए रूस में नए कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है. इनमें भालुओं के शिकार के नियमों में बदलाव और अलग-अलग इलाकों में उनकी संख्या को नियंत्रित करना शामिल है। 

    हालांकि, भालुओं को मारना ही इस समस्या का एकमात्र हल नहीं है. जंगल में खाने की कमी को समझना, कचरे को खुले में नहीं छोड़ना और लोगों को भालुओं से बचने के तरीके बताना भी जरूरी है. भालू जंगल के प्राकृतिक संतुलन का हिस्सा हैं. इसलिए लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ इन जानवरों को बचाना भी जरूरी है. इसके लिए ऐसे कदम उठाने होंगे जिनसे इंसानों और भालुओं के बीच टकराव कम हो सके। 

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