दिल्ली रैली से गायब रहे हरियाणा युवक कांग्रेस के 10 पदाधिकारियों पर गिरी गाज, तत्काल प्रभाव से निलंबित
‘वोट चोरी’ के खिलाफ राहुल गांधी की रैली से दूरी पड़ी भारी, प्रदेश उपाध्यक्ष से लेकर महासचिव और जिला अध्यक्ष तक पर कार्रवाई
संगठनात्मक अनुशासन के नाम पर कार्रवाई, लेकिन कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी भी फिर आई चर्चा में
चंडीगढ़, मंजू कुमारी । दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को आयोजित कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ रैली से दूरी बनाना हरियाणा युवक कांग्रेस के 10 पदाधिकारियों को भारी पड़ गया। रैली में शामिल नहीं होने को संगठनात्मक अनुशासनहीनता मानते हुए हरियाणा युवक कांग्रेस ने अपने प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रदेश महासचिवों और एक जिला अध्यक्ष सहित कुल 10 पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से हरियाणा कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक अनुशासन के साथ-साथ अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
हरियाणा युवक कांग्रेस की ओर से 2 नवंबर 2026 को जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के तहत संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। आदेश के मुताबिक, एक नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट चोरी’ रैली में शामिल नहीं होना संगठनात्मक अनुशासनहीनता की श्रेणी में पाया गया। इसके चलते सभी संबंधित पदाधिकारियों को अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
प्रदेश पदाधिकारी भी कार्रवाई की जद में
निलंबित किए गए पदाधिकारियों में प्रदेश उपाध्यक्ष नवदीप दलाल के अलावा प्रदेश महासचिव विकास कुमार, योगेश फोगाट, सिकंदर प्रधान, पिंकी, अज्रुद्दीन मास्टर अजहर, प्रतीक चौधरी, सतीश कुमार और नवीन यादव शामिल हैं। इनके अलावा रोहतक जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष सुशील हुड्डा को भी निलंबित किया गया है।
कार्रवाई की खास बात यह है कि संगठन ने केवल जिला स्तर के पदाधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे नेताओं पर भी शिकंजा कसा है। इससे साफ संकेत है कि रैली में अनुपस्थिति को लेकर नेतृत्व ने कोई नरमी नहीं बरती।
रैली की गैरमौजूदगी ने खोली संगठन की अंदरूनी परतें!
इस कार्रवाई के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस नेतृत्व भाजपा के खिलाफ ‘वोट चोरी’ जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दे पर देशव्यापी अभियान चलाकर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपने ही संगठन के पदाधिकारियों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर समन्वय और एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से अलग-अलग नेताओं के प्रभाव वाले राजनीतिक खेमों और संगठनात्मक वर्चस्व की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में युवक कांग्रेस के 10 पदाधिकारियों पर एक साथ हुई कार्रवाई को केवल अनुशासनात्मक कदम मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या रैली में अनुपस्थिति महज व्यक्तिगत स्तर पर लिया गया फैसला था या इसके पीछे संगठन के भीतर चल रही नाराजगी, आपसी खींचतान और गुटीय समीकरणों की भी कोई भूमिका थी?
हालांकि, निलंबन आदेश में गुटबाजी या किसी नेता विशेष की भूमिका का उल्लेख नहीं किया गया है। आधिकारिक तौर पर कार्रवाई का आधार रैली में अनुपस्थिति से पैदा हुई संगठनात्मक अनुशासनहीनता को बताया गया है।
अनुशासन का संदेश या असंतोष पर कार्रवाई?
युवक कांग्रेस के इस फैसले ने प्रदेश संगठन के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर नेतृत्व अनुशासन का संदेश देकर संगठन को मजबूत दिखाना चाहता है, तो दूसरी ओर इतने पदाधिकारियों का एक साथ निलंबन कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष और नेतृत्व के साथ तालमेल को लेकर नए सवाल खड़े कर सकता है।
अब देखना होगा कि निलंबन की यह कार्रवाई संगठन में अनुशासन स्थापित करने का माध्यम बनती है या हरियाणा कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में एक नई खाई पैदा करती है। फिलहाल दिल्ली की रैली में गैरमौजूदगी ने हरियाणा युवक कांग्रेस के भीतर चल रही सियासी हलचल को सार्वजनिक कर दिया है।


