लंदन
यूरोप की नदियां अब सिर्फ जमीन पर ही नहीं, अंतरिक्ष से भी सिकुड़ती हुई नजर आने लगी हैं. भीषण गर्मी और लगातार पड़ रहे सूखे ने हालात इतने खराब कर दिए हैं कि सैटेलाइट तस्वीरों में नदी किनारों की चौड़ी रेत की पट्टियां और पानी के भीतर रहने वाले हिस्से तक साफ दिखाई दे रहे हैं. 2023 और 2025 की तस्वीरों से तुलना करें तो फर्क चौंकाने वाला है. ताजा सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि यूरोप की कई प्रमुख नदियां सामान्य दिनों की तुलना में काफी छोटी हो चुकी हैं. जहां पहले पानी बहता था, वहां अब रेत और सूखी जमीन नजर आ रही है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है. लगातार पड़ रही हीटवेव और बारिश की भारी कमी ने नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक गिरा दिया है. नीचे दी गई तस्वीर में आप देख सकते हैं कि ऑस्ट्रिया के वियना के पास डेन्यूब नदी का जलस्तर कितना घट गया है. ऊपर की तस्वीर 30 जुलाई 2026 की है, जबकि नीचे की तस्वीर 7 अगस्त 2025 की. एक साल के भीतर नदी के बीच बने रेत के टापू (सैंडबैंक) पहले की तुलना में कहीं अधिक साफ दिखाई दे रहे हैं।
डैन्यूब ने तोड़ दिया पुराना रिकॉर्ड
यूरोप की दूसरी सबसे लंबी नदी डैन्यूब का जलस्तर हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में सोमवार को सिर्फ 4 इंच रह गया. इस नदी को आप यूरोप की गंगा भी कह सकते हैं. कई देशों की लाइफलाइन इस पर निर्भर करती है. अब यह 2018 में बने 13 इंच के पिछले रिकॉर्ड से भी काफी नीचे है. मौसम विभाग को आशंका है कि इस सप्ताह तापमान और बढ़ने पर जलस्तर में और गिरावट आ सकती है।
पानी के लिए चट्टान तक उड़ानी पड़ी
सूखती डैन्यूब नदी ने रोमानिया में बिजली संकट भी खड़ा कर दिया है. देश के सेरनावोडा परमाणु बिजली संयंत्र तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए रोमानियाई नौसेना को विस्फोटकों से चट्टान उड़ानी पड़ी ताकि नदी का पानी प्लांट की ओर मोड़ा जा सके. यही नहीं, अब सरकार डैन्यूब की एक शाखा में पत्थरों से भरी दो बार्ज डुबोकर अस्थायी बांध बनाने की तैयारी कर रही है, जिससे ज्यादा पानी परमाणु संयंत्र तक पहुंचाया जा सके।
हंगरी में बिजली संकट गहराया
डैन्यूब का जलस्तर गिरने का असर हंगरी के पाक्स परमाणु बिजली संयंत्र पर भी पड़ा है. देश की करीब आधी बिजली पैदा करने वाला यह प्लांट डैन्यूब के पानी से ठंडा किया जाता है. लेकिन पानी की कमी के कारण इसके सभी रिएक्टरों में से सिर्फ एक ही चल रहा है और संयंत्र करीब 10 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहा है. अगर नदी का जलस्तर और गिरा तो संयंत्र पूरी तरह बंद होने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
