अहमदाबाद
गुजरात में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. गुजरात सरकार के UCC विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है. इसके बाद राज्य सरकार ने कानून से जुड़ी राजपत्र अधिसूचना भी जारी कर दी है. राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ गुजरात में UCC को लागू करने की दिशा में अहम कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है. अब इसके प्रावधानों को जमीन पर लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर आगे की प्रक्रिया तेज होगी. सरकार की ओर से लाए गए इस कानून में विवाह से लेकर तलाक और उत्तराधिकार तक कई अहम नियम शामिल हैं. यानी आने वाले समय में परिवार और निजी कानून से जुड़े कई मामलों में लोगों को नए नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
UCC में महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति तथा उत्तराधिकार के मामले में समान अधिकार देने का प्रावधान है. बेटा और बेटी दोनों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा. वहीं अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के प्रावधानों से बाहर रखा गया है. विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने के साथ लिव-इन संबंधों को लेकर भी नियम बनाए गए हैं. बिना वसीयत मृत्यु होने की स्थिति में संपत्ति के बंटवारे के लिए भी नए प्रावधान हैं. ऐसे में गुजरात में UCC लागू होने के बाद विवाह और परिवार से जुड़े मामलों में क्या बदलाव आएंगे इसे समझना जरूरी है।
राज्य के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC-2026) बिल को देश की राष्ट्रपति की तरफ से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद गुजरात सरकार ने इसे 'गुजरात एक्ट नंबर 15 ऑफ 2026' के रूप में अधिसूचित करते हुए 1 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक गुजरात गजट (Gazette) में प्रकाशित कर दिया है।
यह कानून राज्य सरकार द्वारा जारी की जाने वाली आगामी अधिसूचना की तिथि से पूरे गुजरात में पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का ऐसा राज्य बन गया है जहां समान नागरिक संहिता लागू होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
1. विवाह का पंजीकरण होगा जरूरी
UCC के तहत विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है. कानून लागू होने के बाद सभी विवाहों का निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण कराना होगा. दी गई जानकारी के मुताबिक यह अवधि 60 दिन है. तय समय में पंजीकरण नहीं कराने पर जुर्माने का प्रावधान है. विवाह के समय पुरुष की उम्र कम से कम 21 वर्ष और महिला की उम्र 18 वर्ष होना जरूरी होगा. खास बात यह है कि UCC पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों को खत्म नहीं करता. अलग-अलग धर्मों में विवाह की जो परंपराएं हैं वे जारी रह सकती हैं. हालांकि विवाह का कानूनी पंजीकरण जरूरी होगा।
गुजरात के UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं.
2. एक से ज्यादा विवाह पर रोक
UCC में एकविवाह का नियम रखा गया है. यानी पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह नहीं किया जा सकता. इसका मतलब है कि वैवाहिक स्थिति में रहते हुए दोबारा विवाह करने पर कानूनी दिक्कत हो सकती है. तलाक और विवाह से जुड़े मामलों के लिए भी कानून में प्रक्रिया तय की गई है. इसके अलावा विवाह का पंजीकरण नहीं होने पर सरकारी दस्तावेजों या रोजगार से जुड़े रिकॉर्ड में वैवाहिक स्थिति बदलने पर भी असर पड़ेगा. ऐसे मामलों में पहले विवाह का पंजीकरण जरूरी होगा।
3. लिव-इन रिलेशनशिप पर भी नए नियम
गुजरात के UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. लिव-इन में रहने वाले या ऐसा संबंध शुरू करने वाले जोड़ों को रजिस्ट्रार के सामने संयुक्त बयान देकर पंजीकरण कराना होगा. यानी ऐसे संबंधों को लेकर सरकार के पास आधिकारिक रिकॉर्ड रहेगा. लिव-इन रिलेशनशिप खत्म होने पर भी रजिस्ट्रार को इसकी जानकारी देनी होगी. यह सूचना संयुक्त रूप से या किसी एक पक्ष की ओर से दी जा सकती है. इस तरह लिव-इन संबंधों को भी कानून के दायरे में लाने की कोशिश की गई है।
4. बेटा-बेटी को संपत्ति में बराबर अधिकार
UCC में उत्तराधिकार को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है. बिना वसीयत बनाए किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके जीवनसाथी बच्चों और माता-पिता को संपत्ति में कानूनी अधिकार मिलेगा. बेटे और बेटी के बीच उत्तराधिकार में भेद नहीं किया जाएगा. इसके अलावा विवाह के बाहर जन्मे बच्चों और सरोगेसी या गोद लेने के जरिए परिवार में आए बच्चों को भी जैविक बच्चों के समान कानूनी और उत्तराधिकार संबंधी अधिकार दिए गए हैं. महिलाओं को भी संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में पुरुषों के बराबर अधिकार देने का प्रावधान है।
5. आदिवासी समुदाय को कानून से छूट
गुजरात UCC का एक अहम प्रावधान अनुसूचित जनजातियों से जुड़ा है. संविधान के अनुच्छेद 366(25) और 342 के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के प्रावधानों से छूट दी गई है. संविधान के भाग 21 के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले कुछ समूह भी इसके दायरे से बाहर रहेंगे. इसके अलावा विवाह या तलाक से जुड़े विवादों में अदालत जाने से पहले मध्यस्थता का विकल्प रखा गया है. यानी विवाद को अदालत तक ले जाने से पहले आपसी समाधान की कोशिश की जा सकती है. राष्ट्रपति की मंजूरी और राजपत्र अधिसूचना के बाद अब UCC के प्रावधानों को लागू करने से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
शादी का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों में अनिवार्य; भारी जुर्माने का प्रावधान
गुजरात UCC-2026 के लागू होने के बाद विवाह (Marriage) और तलाक (Divorce) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव आएगा:
60 दिनों की सीमा: विवाह संपन्न होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन के लिए मेमोरेंडम जमा करना अनिवार्य होगा।
लापरवाही पर जुर्माना: निर्धारित समय में शादी का पंजीकरण न कराने पर ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नोटिस के बाद भी अनदेखी: यदि नोटिस जारी किए जाने के बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता है, तो जुर्माने की राशि बढ़कर ₹25,000 तक हो सकती है।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कड़े और स्पष्ट नियम
UCC के तहत लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) को भी कानूनी दायरे में लाते हुए इसके रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाया गया है:
कानूनी दर्जा व भरण-पोषण: लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चे को वैध/कानूनी संतान का पूर्ण दर्जा प्राप्त होगा। इसके अलावा, यदि पुरुष साथी महिला को छोड़ता है, तो महिला को भरण-पोषण मांगने का कानूनी अधिकार होगा।
गलत जानकारी देने पर सजा: लिव-इन रजिस्ट्रेशन के दौरान झूठी या गलत जानकारी देने पर 3 महीने तक की जेल या ₹25,000 तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।
नाबालिगों के लिए रोक: किसी भी नाबालिग के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने को लेकर अत्यंत सख्त और दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं।
अनुसूची जनजातियों (ST) को छूट और पुराने कानूनों पर प्रभाव
अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को छूट: संविधान के Part XXI के तहत संरक्षित परंपरागत अधिकारों वाले समूहों और अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस UCC कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
पुराना कानून रद्द: इस नए कानून के लागू होते ही 'Gujarat Registration of Marriages Act, 2006' को निरस्त (Repeal) कर दिया जाएगा। साथ ही, शादी व तलाक से जुड़े पुराने व्यक्तिगत कानूनों की असंगत धाराएं UCC के प्रभाव से बेअसर हो जाएंगी।
मार्च 2026 में विधानसभा में पास हुआ था बिल
गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने मार्च 2026 में UCC बिल को राज्य विधानसभा में पेश कर पास कराया था। इसके बाद इसे अंतिम मंजूरी और हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति भवन भेजा गया था। राष्ट्रपति की मोहर लगते ही अब गुजरात में UCC-2026 लागू होने का ऐतिहासिक रास्ता साफ हो गया है।
