Friday, September 25

दीपावली से पहले उत्तराखंड में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ गया है। खासकर शाम के पीक आवर्स में बिजली संकट ज्यादा गहरा रहा है। पावर एक्सचेंज में करीब 10 रुपये प्रति यूनिट तक कीमत चुकाने के बावजूद राज्य को जरूरत के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है। पीक समय में करीब 350 मेगावाट तक की कमी के चलते कई क्षेत्रों में कटौती करनी पड़ रही है।
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी के अनुसार, बिजली संकट की प्रमुख वजह जलविद्युत उत्पादन में कमी है। सितंबर में यूजेवीएनएल से पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में औसतन करीब 170 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। नदियों में जल प्रवाह घटने के कारण पीक आवर्स में जलविद्युत उत्पादन करीब 1094 मेगावाट से घटकर 912 मेगावाट रह गया है।
केंद्रीय परियोजनाओं से भी घटा उत्पादन
केंद्रीय जलविद्युत परियोजनाओं से भी करीब 90 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। वहीं, टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी कारणों से बंद हैं। इससे पीक आवर्स में करीब 100 मेगावाट बिजली की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
दूसरी ओर, देशभर में बारिश के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से कोयला आधारित बिजली संयंत्रों का उत्पादन भी दबाव में है। इसका असर बिजली की उपलब्धता पर पड़ रहा है। ऐसे में पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदकर कमी पूरी करने का विकल्प भी सीमित हो गया है।
एक्सचेंज से भी सीमित मिल रही बिजली
यूपीसीएल के अनुसार, पीक आवर्स में पावर एक्सचेंज से राज्य की कुल जरूरत के मुकाबले केवल एक से दो प्रतिशत अतिरिक्त बिजली ही मिल पा रही है। बाजार में पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिक कीमत चुकाने के बावजूद मांग के अनुरूप बिजली जुटाना चुनौती बना हुआ है।
49.50 हर्ट्ज तक गिर रही ग्रिड फ्रीक्वेंसी
शाम के पीक समय में ग्रिड फ्रीक्वेंसी करीब 49.50 हर्ट्ज तक गिर रही है। इसके चलते एनआरएलडीसी ने निर्धारित सीमा से अधिक बिजली लेने यानी ओवरड्रॉल पर भी अंकुश लगाया है। ऐसे में यूपीसीएल के पास बिजली खरीदने के लिए संसाधन होने के बावजूद पीक समय में बाजार से पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
केंद्र से मांगी 100 से 400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली
यूपीसीएल के एमडी पीसी ध्यानी ने बताया कि राज्य की जरूरत को देखते हुए केंद्र से अलग-अलग महीनों के लिए 100 से 400 मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली की मांग की गई है। विभाग का प्रयास है कि उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर मांग और आपूर्ति के अंतर को कम किया जा सके।

Leave A Reply

Exit mobile version