Monday, September 14

नई दिल्ली

भारत में थोक महंगाई (WPI) अगस्त में बढ़कर 9.92 फीसदी पर पहुंच गई है. जुलाई में यह आंकड़ा 9.78 फीसदी था. यानी एक महीने में थोक महंगाई में 0.14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों, तैयार सामान और ईंधन-बिजली से जुड़ी कीमतों में तेजी ने महंगाई को ऊपर धकेला है. खास बात यह है कि ईंधन और बिजली की महंगाई बाकी प्रमुख श्रेणियों के मुकाबले काफी ज्यादा रही। 

खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी अगस्त के दौरान दबाव बढ़ा. फूड इंडेक्स में थोक महंगाई अगस्त में 7.05 फीसदी रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 फीसदी थी. यानी एक महीने में खाद्य महंगाई में 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. महंगाई बढ़ने में मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुएं और खाद्य उत्पादों का निर्माण जैसी श्रेणियों की अहम भूमिका रही. पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रमों के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरक की लागत बढ़ने का असर भी कीमतों पर पड़ा है। 

मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स में तेजी

अगस्त में मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की थोक महंगाई 8.37 फीसदी रही. जुलाई में यह 8.29 फीसदी थी. यानी इस श्रेणी में भी महंगाई बढ़ी है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, बेसिक मेटल्स का निर्माण, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण अगस्त में थोक कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहे। 

फ्यूल-पावर में ज्यादा महंगाई
थोक महंगाई के आंकड़े में सबसे ज्यादा दबाव फ्यूल और पावर से आया. इस श्रेणी में अगस्त की महंगाई दर 22.93 फीसदी रही. यह दर फूड और मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की तुलना में काफी ज्यादा है. मिनरल ऑयल की कीमतों में बदलाव का भी इस श्रेणी पर असर पड़ा है. ईंधन की लागत बढ़ने का असर आगे ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है, जिसका प्रभाव दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। 

महंगाई बढ़ने की बड़ी वजहें ये रहीं
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, अगस्त में थोक कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाली प्रमुख चीजों में मिनरल ऑयल, फूड आर्टिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स का निर्माण, बेसिक मेटल्स का निर्माण, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण शामिल रहे. यानी महंगाई का दबाव सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा. खाने-पीने की चीजों से लेकर ईंधन और औद्योगिक सामान तक कई हिस्सों में कीमतें बढ़ीं। 

RBI के लिए भी अहम है आंकड़ा
थोक महंगाई का यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब रिजर्व बैंक महंगाई और ब्याज दरों के रुख पर नजर रख रहा है. पिछले महीने मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बेंचमार्क पॉलिसी रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था. RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 फीसदी रखा है. केंद्रीय बैंक ने कमजोर और असमान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून और अल नीनो की स्थिति को महंगाई के लिए जोखिमों में शामिल किया था। 

आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
थोक महंगाई सीधे तौर पर आपकी खरीदारी की कीमत तय नहीं करती, लेकिन इसमें लगातार बढ़ोतरी का असर आगे चलकर कारोबार की लागत और कुछ वस्तुओं की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है. फिलहाल अगस्त के आंकड़ों में फूड, फ्यूल और पावर तथा मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स तीनों में दबाव दिखाई दे रहा है. इसलिए आने वाले महीनों में इन तीनों क्षेत्रों की कीमतों का रुख अहम रहेगा. अगर ईंधन और कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रहती है, तो महंगाई पर दबाव भी आगे बना रह सकता है। 

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