Sunday, October 4

युद्ध के मैदान में अब हथियारों के साथ तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में देहरादून स्थित इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड समूह की अनुसंधान परियोजनाओं में ऐसी उन्नत रक्षा प्रणाली विकसित करने पर काम चल रहा है, जिसमें टैंक के साथ मानवरहित ड्रोन मिलकर काम करेगा। ड्रोन टैंक से पहले आगे के क्षेत्र की निगरानी करेगा, जबकि एआई सेंसर से मिले आंकड़ों का विश्लेषण कर महत्वपूर्ण वस्तुओं और संभावित लक्ष्यों की पहचान में मदद करेगा।
मानवयुक्त-अमानवयुक्त तालमेल पर आधारित इस परियोजना को आयुध निर्माणी चंडीगढ़ और आईआईटी रोपड़ के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है। परियोजना के तहत छोटे मानवरहित हवाई वाहन को इस तरह विकसित करने पर काम हो रहा है कि वह दिन और रात दोनों समय स्वायत्त रूप से उड़ान भर सके। ड्रोन टैंक से पहले आगे बढ़कर क्षेत्र की निगरानी करेगा और वहां मौजूद गतिविधियों तथा महत्वपूर्ण वस्तुओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
प्रस्तावित प्रणाली में ड्रोन से प्राप्त तस्वीरों और वीडियो के साथ सेंसर से मिलने वाले अन्य आंकड़ों का एआई के माध्यम से विश्लेषण किया जाएगा। इसका उद्देश्य संदिग्ध वस्तुओं, वाहनों और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की पहचान में सहायता करना है। इससे टैंक दल को आगे के क्षेत्र की स्थिति का आकलन करने के लिए सीधे जोखिम वाले इलाके में जाने की जरूरत कम हो सकती है।
इंडिया ऑप्टेल समूह की अनुसंधान परियोजनाओं में एआई आधारित हथियार दृष्टि प्रणाली भी शामिल है। इसके जरिए दिन और रात के समय छद्मावरण के बीच मौजूद लक्ष्यों की पहचान और निगरानी में सहायता देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसमें पारंपरिक प्रकाशीय उपकरणों के साथ एआई आधारित पहचान क्षमता को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
रक्षा क्षेत्र में ड्रोन, सेंसर और एआई के एक साथ इस्तेमाल से निगरानी और लक्ष्य पहचान की प्रक्रिया को अधिक स्वचालित बनाने की दिशा में काम हो रहा है। देहरादून में चल रही ये अनुसंधान परियोजनाएं रक्षा तकनीक में हो रहे इसी बदलाव का हिस्सा हैं।

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