मुंबई
शेयर बाजार में गुरुवार को भारी तबाही देखने को मिली थी. खासकर बीमा कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा तबाही दिखी, जहां PB Fintech के शेयरों में 36 फीसदी तक की गिरावट आई. इसके बाद Turtlemint के शेयर करीब 20 फीसदी तक गिर गए. साथ ही HDFC Life और ICICI Prudential Life जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली. आज भी इन शेयरों में गिरावट देखी जा रही है।
इन सभी शेयरों में गिरावट की एक खास वजह, IRDAI का एक प्रस्ताव था. इसमें कुछ ऐसी बातों का जिक्र किया गया है, जिससे इन कंपनियों का रेवेन्यू घट जाएगा. साथ ही प्रॉफिट और मार्जिन पर भी तगड़ा असर होने की उम्मीद जताई गई है. इसी कारण, इन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई, लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर इस प्रस्ताव में ऐसा क्या है, जिस कारण किसी कंपनी का शेयर 36 फीसदी तक टूट सकता है? आइए जानते हैं पूरी डिटेल…
पॉलिसी पेपर में ऐसा क्या है?
1. कमीशन पर लिमिट लगाने की तैयारी
IRDAI ने लाइफ, हेल्थ और मोटर बीमा में प्रोडक्ट्स और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के हिसाब से कमीशन लिमिट दोबारा लागू करने का प्रस्ताव दिया है. साल 2023 में कमीशन पर मौजूद सेगमेंट वाली लिमिट हटाई गई थी।
2. हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस में कमीशन
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ढांचे में हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस के नए बिजनेस पर कमीशन काफी कम हो सकता है. कुछ मामलों में अनुमानित कटौती करीब एक-तिहाई से दो-तिहाई तक की जा सकती है।
3. लाइफ इंश्योरेंस में कमीशन
अभी कमीशन का बड़ा हिस्सा पॉलिसी बेचने के समय या शुरुआती अवधि में मिल सकता है. प्रस्ताव में कहा गया है कि इस पॉलिसी टर्म के दौरान ज्यादा फैलाना चाहिए. इससे असर होगा कि डिस्ट्रीब्यूशन की शुरुआती कमाई प्रभावित होगी और कंपनियों का रेवेन्यू घट सकता है।
4. बीमा कंपनियों के खर्च की सीमा घटाने का प्रस्ताव
IRDAI ने एक्सपेंसेस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) को भी राश्नलाइज करने का प्रस्ताव रखा है. जनरल इंश्योरेंस के लिए EoM सीमा को पांच साल में GWP के 30% से डोमेस्टिक GDPI के 20% तक लाने का प्रस्ताव बताया गया है. इससे कंपनियों की कमाई पर तगड़ा असर हो सकता है।
5. लोन के साथ जबरन बीमा बेचने पर रोक
बैंकों और एनबीएफसी को लोन के साथ इंश्योरेंस को अनिवार्य करने से रोकने का प्रस्ताव दिया गया है. इससे उन बैंकों की इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन फीस इनकम पर भी असर पड़ने की आशंका बाजार में बनी है।
6. डॉर्क पैटर्न पर रोक
कंपनियों को ऐसी डिजान या प्रॉसेस से रोकना है, जिसमें कस्टमर्स को किसी खास विकल्प की ओर भ्रमित या मजबत किया जा रहा है. जैसे प्रोडक्ट की कीमत या बाकी फीचर्स की जानकारी से पहले ही कस्टमर्स से पूरी डिटेल मांगना है।
सीधे शब्दों में कहें तो IRDAI का प्रस्ताव कहता है कि इंश्योरेंस बेचने पर कंपनियों या डिस्ट्रीब्यूटर्स कितना कमीशन ले सकेंगे, खर्च कितना कर सकेंगे और कस्टमर्स को पॉलिसी कैसे बेच सकेंगे, इन सभी पर ज्यादा कंट्रोल होगा. बाजार को डर है कि इन कमीशन बेस्ड कमाई से कंपनियों की अर्निग पर बड़ा झका लग सकता है।
सरकार क्यों लेकर आई ये प्रस्ताव?
इंश्योरेंस की बिक्री में मिस-सेलिंग कम करना
इंश्योरेंस की लागत कम करना
ग्राहक को पता चले कि उसका पैसा किसे और क्यों जा रहा है
बैंक से लोन लेते समय जबरन Insurance बेचने की शिकायतें रोकना
3 जुलाई को आई थी ये रिपोर्ट
जुलाई में ही ये प्रस्ताव पब्लिक हो गया था. रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि IRDAI commission व्यवस्था में बड़ा बदलाव तैयार कर रहा है. खासकर बड़े अपफ्रंट में कमीशन को कम करके पॉलिसी की अवधि में भुगतान पर विचार कर रहा है. तब 4 से 5 सप्ताह में इसे लाने का प्रस्ताव था, लेकिन इसे 2 से 3 महीने के बाद पेश किया गया है।
